सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

RINGWORM AND HOMOEOPATHY(दाद)

 [3/14, 16:07] Dr.J.k Pandey: दाद त्वचा पर होने वाली एक समस्या है जो फंगल इन्फेक्शन की वजह से होती है और भयंकर संक्रामक है. इसे अंग्रेजी में रिंगवर्म (Ringworm) के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस रोग में त्वचा पर लाल लाल गोल निशान दिखाई देते हैं जिनका आकार रिंग की तरह होता है. रिंगवर्म का इलाज न होने पर यह त्वचा पर लगातार फैलता रहता है. अगर आपने जरा सी भी लापरवाही की तो इसे फैलने में समय नहीं लगता. यह वैसे तो शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है लेकिन पैरों और शरीर के ऐसे हिस्से जो ढंके हुए रहते हैं जैसे, भीतरी भीतरी जांघों, महिलाओं के शरीर में वक्षों के निचले हिस्से और शरीर के जो हिस्से आपस में जुड़े होते हैं ऐसी जगह दाद का खतरा अधिक होता है.


दाद के लक्षणों को कैसे पहचाने और उसका बचाव कैसे करें। (How to identify and cure ringworm?)

हम हमेशा चाहते हैं की हमारा शरीर साफ़ और स्वस्थ रहे हम कभी भी नहीं चाहेंगे की हमे किसी तरह का कोई इन्फेक्शन या बीमारी लगे। वैसे तो हम अपने शरीरका हमेशा ध्यान रखते हैं लेकिन उसके बावजूद हमे कुछ बातों का विशेष तौर पर ध्यान रखना चाहिए। हमे इन्फेक्शन कभी भी हो सकता है जैसे आप यात्रा कर रहे हों काम पर जा रहे हों तो ध्यान दे की आपका कोई साथी या आस पास के लोग बीमार तो नहीं हैं। नहाने के पानी मे 2 बून्द सेवलोंन या डेटोल डाल कर नहाएं। दाद एक ऐसी बिमारी है जो हर उम्र के लोगो मे हो सकती है बच्चा जवान या बुज़ुर्ग इससे कोई नहीं बच पाता। ये एक फंगल इन्फेक्शन है जो सर, पैर, गर्दन या किसी अंदरुनी भाग मे कहीं भी हो सकता है। ये लाल या हलके ब्राउन रंग का गोल आकार का होता है। ये इंसान, जानवर किसी से भी फैल सकता है। लेकिन डरें नहीं ये आसानी से ठीक भी हो जाता है। ये किसी कीड़े से नहीं होता ये तो एक फंगल इन्फेक्शन (Fungal Infection) है।


दाद का इन्फेक्शन बहुत ख़राब फंगल इन्फेक्शन होता है ।अगर आपको ये इन्फेक्शन है तो आप अपने शरीर के किसी भी हिस्से पर लाल गोल निशान देख सकते हैं। ये बहुत तेज़ी से फेलता है जिस जगह पर हुआ है उसके आस पास की जगह पर भी फैलने लगता है। इसका इन्फेक्शन ज्यादा बढ़ने पर आप शरीर पर उभार और फुंसियाँ भी देख सकते हैं।


रिंगवर्म या दाद के लक्षण (Symptoms of ringworm infection)

अगर आपको शरीर पर लाल धब्बे दीखते हैं और खुजली होती है तो सावधान हो जाइए ये दाद है अगर ये आपके नाख़ून पर हुआ तो आपका नाख़ून जड़ से निकल सकता है बालों की जड़ो मे हुआ तो आपके बाल उस जगह से झड़ सकते हैं। ये आपको बालों की जड़ो, पैर, अंदरुनी भागो में हो सकता है।


बालों की जड़ो में होने के लक्षण।


जड़ो में खुजली होना

छोटी छोटी फुंसी होना

बालों का झड़ना

चमड़ी का तड़कना

पस होना

दाद के प्रकार (Types of ringworm)

शरीर पर लक्षण (Symptoms in body)


लाल पन और खुजली होना।

पस की फुंसियाँ होना

खुजली के साथ उभार दिखना।

पैरों पर लक्षण (Symptoms in foot)


इर्रिटेशन और जलन होना।

फटी हुई चमड़ी

अंदरुनी भागों पर लक्षण (Groin ringworm symptoms)


कटाव या चमड़ी निकलना।

लालपन होना

अंदरुनी भागो में खुजली होना।

दाद का इलाज (Daad ka ilaj) और रिंगवर्म या दाद से बचने के उपाय और उपचार (Prevention,treatment and cure for ringworm infection)

हमेशा अपने शरीर को साफ़ रखें। शरीर को गिला न रखें हमेशा सुखा रखने की कोशिश करें।  जहाँ तक हो सके कॉटन के कपडे पहने। ज्यादा चुस्त कपडे ना पहनें। दूसरों के कपडे, तोलिया, बेड शीट, ब्रश का उपयोग ना करें। अगर किसी को ये इन्फेक्शन है तो उनसे दुरी रखें हाथ ना मिलाएं क्योंकि ये इन्फेक्शन फेलता है। अगर आपके घर मे कोई जानवर है और उसे ये इन्फेक्शन है तो उस पर पट्टी कभी ना बांधें और तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएँ।







दाद की सामान्य चिकित्सा

इस रोग में लक्षणानुसार निम्नलिखित औषधियाँ लाभ करती हैं :-


वैसीलिनम 30, 200, 1M – इस औषध की 30 शक्ति की एक मात्रा, एक सप्ताह तक देनी चाहिए । फिर सप्ताह में एक बार के हिसाब से 200 शक्ति की एक मात्रा 4 सप्ताह तक देनी चाहिए। तत्पश्चात् 1M की मात्रा को महीने में एक बार के हिसाब से 5-6 महीने तक देना चाहिए । इस क्रम में 6-7 महीने तक इस औषध का सेवन करते रहने पर दाद हमेशा के लिए चला जाता है । यह इस रोग की मुख्य औषध मानी जाती है। इसके सेवन से सिर में रूसी, बाल झड़ना तथा बालक की ग्रीवा के ग्रन्थि-रोग में लाभ होता है । बालकों के दाद में यह औषध बहुत प्रभावकारी सिद्ध होती हैं ।

सल्फर 30 – यदि दाद के साथ ही पेट की गड़बड़ी, खट्टी डकारें आना, पेट में अम्लत्व या गैस बनना, उबकाई आना, भूख न लगना, रात के समय बेचैनी का अनुभव, सिर का गरम होना तथा हाथ-पाँवों का ठण्डा रहना – ये सब लक्षण भी हों, तो इस औषध के सेवन से लाभ होता हैं ।

कैल्केरिया-कार्ब 30 – यदि रोगी का शरीर ‘कैल्केरिया’ प्रकृति का हो, मोटा तथा थुलथुल शरीर, जगह-जगह ग्रन्थियाँ तथा हाथ-पाँवों का पसीजना – इन लक्षणों में इस औषध की एक-एक मात्रा नित्य प्रात:-सायं पाँच-सात दिनों तक दें ।

टैल्यूरियम 6 – शरीर में किसी भी स्थान पर दाद होने पर यह औषध बहुत लाभकर सिद्ध होती है । दाद के धब्बे, अंगूठी के आकार का दाद, हाथ-पाँवों में खुजली, नाई के उस्तरे के कारण उत्पन्न खुजली, त्वचा में डंक मारने जैसा अनुभव, पाँवों में दुर्गन्धित-पसीना आना, कान के पीछे अथवा सिर के पीछे निम्न-भाग में एग्जिमा तथा एग्जिमा के गोलाकार दाद जैसे चकत्ते – इन सब उपसर्गों में यह औषध लाभ करती है ।

सीपिया 30 – यदि आवश्यकता हो तो इस औषध को ‘सल्फर’ के बाद दिया जा सकता है । यह सिर के दाद में बहुत लाभ करती है। ‘सीपिया 30’ को मुख द्वारा सेवन करने के साथ ही, सिर के बाल कटवा कर, ‘सीपिया 1x’ को पानी अथवा ग्लीसरीन में मिलाकर सिर के दाद वाले भाग पर मलने से शीघ्र लाभ होता है ।

नेट्रम-सल्फ 200, 1000 – यदि उक्त औषधियों से लाभ न हो तो महीने में एक बार इस औषध का सेवन करना हितकर सिद्ध होता है ।

विशेष – उक्त औषधियों के अतिरिक्त लक्षणानुसार निम्नलिखित औषधियों के प्रयोग की भी

[3/14, 16:10] Dr.J.k Pandey: हिपर-सल्फर, एसिड-नाइट्रिक, सल्फर, ग्रैफाइटिस, फास्फोरस, रस टाक्स तथा मर्क-कोर । इन औषधियों को 6 से 30 तक की शक्ति में प्रयोग करें।

स्त्रियों के दाद के लिए – कैलेडियम तथा सैंगुइनेरिया विशेष लाभ करती है।

क्रासोबियम (CHRYSAROBINUM 30) : यह एक होम्योपैथिक मेडिसिन जो दाद के मुख्य कारक पर असर करती है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कैनुला क्या है?कैनुला कैसे लगाते हैं ? Cannulation in Hindi

 कैनुला कैसे लगाते हैं ? Cannulation in Hindi कैनुला क्या है? कैनुला एक पतली ट्यूब है, जिसे शरीर में नसों के जरिए इंजेक्ट किया जाता है, ताकि जरूरी तरल पदार्थ को शरीर से निकाला (नमूने के तौर पर) या डाला जा सके। इसे आमतौर पर इंट्रावीनस कैनुला (IV cannula) कहा जाता है। बता दें, इंट्रावीनस थेरेपी देने के लिए सबसे आम तरीका पेरिफेरल वीनस कैनुलेशन (शरीर के परिधीय नसों में कैनुला का उपयोग करना) है। इंट्रावीनस (नसों के अंदर) प्रबंधन का मुख्य लक्ष्य ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना, सुरक्षित और प्रभावी ढंग से उपचार प्रदान करना है। जब किसी मरीज का लंबे समय तक उपचार चलता है, तो ऐसे में इंट्रावीनस थेरेपी की विशेष जरूरत पड़ती है। शोध से पता चला है कि जिन मामलों में इंट्रावीनस कैनुला की जरूरत नहीं होती है, उनमें भी इसका प्रयोग किया जाता है, जबकि कुछ मामलों में इसे टाला जा सकता है। जनरल वार्डों में भर्ती 1,000 रोगियों पर हाल ही में एक शोध किया गया, इस दौरान इन सभी मरीजों के नमूने लिए गए। अध्ययन में पाया गया कि लगभग 33% रोगियों में इंट्रावीनस कैनुला का प्रयोग सामान्य से अधिक समय के लिए किया जा रहा है। ...

डायबिटीज क्यों नहीं रुक रही? असली कारण।।

🎬 👉 “आप दवा ले रहे हो… sugar control कर रहे हो… फिर भी Diabetes क्यों बढ़ रही है? 😳 सच्चाई जानकर चौंक जाओगे!” 🎬 “India में Diabetes के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं… हर घर में कोई न कोई sugar का patient है… लेकिन सवाल है—इतनी awareness के बाद भी ये बीमारी रुक क्यों नहीं रही?” 🎬  ❌ 1. Root Cause नहीं, सिर्फ Sugar Control “हम सिर्फ sugar level कम करते हैं… लेकिन असली समस्या—insulin resistance—को ignore कर देते हैं!” ❌ 2. Lifestyle नहीं बदलते “दवा लेते हैं… लेकिन: 🍔 junk food जारी 📱 no exercise 😴 poor sleep 👉 फिर diabetes कैसे रुकेगी?” ❌ 3. Stress – Silent Killer “Stress hormones sugar को बढ़ाते हैं… लेकिन लोग इसको seriously नहीं लेते!” ❌ 4. Processed Food का जाल “Hidden sugar हर चीज में है— biscuits, bread, packaged food… 👉 unknowingly sugar बढ़ रही है!” ❌ 5. Early Detection नहीं “लोग तब test कराते हैं जब disease बढ़ चुकी होती है… 👉 pre-diabetes stage miss हो जाती है!” 🎬 💥 “Diabetes इसलिए नहीं रुक रही क्योंकि हम 👉 बीमारी को नहीं, सिर्फ numbers को treat कर रहे हैं!” 🎬 ✅ “अगर...

आर्टेरियल ब्लड गैस टेस्ट (एबीजी) - Arterial Blood Gas (ABG) in Hindi

 आर्टेरियल ब्लड गैस टेस्ट (एबीजी) - Arterial Blood Gas (ABG) in Hindi आर्टेरियल ब्लड गैस टेस्ट (एबीजी) क्या है? एबीजी टेस्ट धमनियों के रक्त की अम्लता और उनमें मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड व ऑक्सीजन के स्तर का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसकी मदद से यह पता लगाया जाता है, कि फेफड़े कितने अच्छे से ऑक्सीजन को खून में पहुंचा पा रहे हैं और सीओ 2 को बाहर निकाल रहे हैं। फेफड़ों की जांच करके और खून में रक्त के स्तर की जांच करके मेटाबॉलिज्म संबंधी विकारों का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा इन परीक्षणों की मदद से गुर्दे और फेफड़ों के कार्य की जांच की जा सकती है।  आमतौर पर एबीजी टेस्ट निम्न को मापता है: पीएच पार्शियल प्रेशर ऑफ़ ऑक्सीजन (पीएओ2) रक्त में घुला हुआ।  पार्शियल प्रेशर ऑफ़ सीओ2 (पीएसीओ2) रक्त में मौजूद।  ऑक्सीजन कंटेंट (ओ 2 सीटी) या 100 मिलीलीटर रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा। ऑक्सीजन सेचुरेशन (ओ 2 एसएटी) या ऑक्सीजन को ले जाने में प्रयुक्त हीमोग्लोबिन का प्रतिशत। लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद हीमोग्लोबिन रक्त में ऑक्सीजन ले जाता है।  बाईकार्बोनेट: अम्ल-क्षार के मेटाबॉलिक घ...