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मानसिक रोग क्या है? (What is mental illness?


 मानसिक रोग क्या है? (What is mental illness?)

जब किसी यानि व्यक्ति ठीक से सोच नहीं पाता, उसका अपने आप पर कंट्रोल नहीं रहता, तो व्यक्ति की ऐसी अवस्था को मानसिक रोग कहते हैं। आमतौर पर मानसिक रोगी आसानी से दूसरों को समझ नहीं  पाते हैं। इसके अलावा, किसी भी काम को सही ढंग से करने में भी दिक्कत होती है।


मानसिक रोग के लक्षण? (symptoms of mental illness?)

मानसिक रोग के लक्षण, सभी व्यक्ति में एक तरह के नहीं होते, बल्कि यह हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। ये इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्ति के हालात कैसे हैं और उसे कौन-सी मानसिक बीमारी है। कुछ लोगों में इसके लक्षण काफी लंबे समय तक रहते हैं और साफ नजर आते हैं, जबकि कुछ लोगों में शायद थोड़े समय के लिए हों और साफ नजर न आएं। ऐसे में आइए साइकोलॉजिस्ट के मुताबिक जानते हैं, मानसिक रोग के मुख्य लक्षण-


• अगर आपको यह याद नहीं कि आप आखिरी बार खुश कब थे।


•बिस्तर से उठने या नहाने जैसी डेली रुटीन की चीजें भी करनी मुश्किल लगती हैं।


•आप लोगों से कटने यानि दूर रहने की कोशिश करने लगे हैं।


• आप खुद से नफरत करते हैं और अपने आप को खत्म कर लेना चाहते हैं।


• उदास महसूस करना।


• शराब या नशीली दवाओं का सेवन।


• अत्यधिक क्रोध या हिंसक व्यवहार।


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मानसिक  रोग  के प्रकार  (types of mental illness)

मानसिक रोग कई प्रकार के होते हैं। इसके कुछ प्रकार निम्नलिखित हैं -


• बाइपोलर डिसआर्डर


• अल्जाइमर रोग


• डिमेंशिया (मनोभ्रंश)


• पार्किंसन रोग


• आटिज्म


• डिस्लेक्सिया


• एडीएचडी


• डिप्रेशन (अवसाद)


• तनाव


• चिंता


• लत्त सम्बन्धी विकार


• ओसीडी (मनोग्रसित बाध्यता विकार)


• पीटीएसडी (पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रैस डिसऑर्डर)


• याददाश्त खोना


• भूलने की बीमारी


• डर (फोबिया)


• भ्रम (Delusion)


• स्किज़ोफ़्रेनिया


मानसिक बीमारी से छुटकारा कैसे पाएं? (how to get rid of mental illness?)

1.साइकोलॉजिस्ट से सलाह लें

मानसिक रोग से छुटकारा पाने का मुख्य और सबसे आसान तरीका साइकोलॉजिस्ट की सलाह लेना है। साइकोलॉजिस्ट की सलाह या परामर्श से मानसिक रोग को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है। 


2.अपनों से जुड़े रहें

मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्तियों के लिए अपनों से जुड़ाव होना बेहद ज़रूरी है। अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ थोड़ा वक़्त बिताने की कोशिश करें। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और खुद की एहमियत व कीमत भी महसूस होगी।


3.अच्छे दोस्त बनाएं

एक सेहतमंद व्यक्ति के अलावा, मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्तियों को भी अच्छे दोस्त बनाने चाहिए। अच्छे दोस्त आपको आवश्यक सहानुभूति प्रदान करते हैं और साथ ही साथ अवसाद के समय आपको सही निजी सलाह भी देते हैं।


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4.आराम देने वाली चीज़े करें  

ऐसी जो भी चीज़े हैं जिनसे आपको बेहद आराम महसूस होता है। उनमें से कुछ जैसे नहाना, गाने सुनना या अपने प्यारे कुत्ते के साथ टहलने निकलना आदि  शामिल है। अगर आपको लगता है कि इनसे आपके मस्तिष्क को बेहद आराम महसूस होता है तो इन्हे करने के लिए रोज़ाना कुछ समय निकालिये।


5.प्रकृति के बीच रहें

प्रकृति के बीच रहना, जैसे पार्क या ग्रामीण इलाके खासकर आपके लिए बेहद अच्छे होते हैं। वहीं, अगर आपके पास बगीचा नहीं है तो आप घर के अंदर पौधे या पालतू जानवर रख सकते हैं, जिससे आपका मूड ठीक रहेगा रहे और आप प्रकृति के बीच भी बने रहेंगे।


6.शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें

इसके लिए मानसिक रोगी, पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। इसके अलावा, शारीरिक गतिविधियां करें। जैसे  व्यायाम करें, पैदल चलें और स्वीमिंग करें। वहीं, ड्रग्स और शराब का सेवन न करें।


7.पौष्टिक आहार लें

फल, सब्जी, मांस, फलियां, और कार्बोहाइड्रेट आदि का संतुलित आहार लेने से मन खुश रहता है। पौष्टिक आहार से न केवल शरीर स्वस्थ्य रहता है, बल्कि यह दुखी मन को भी अच्छा बना देता है।


Mental illness  होने पर क्या करें? (What to do if you have a mental illness?)

एक ऐसा भी वक्त था जब मानसिक रोग से पीड़ित ज़्यादातर व्यक्तियों को पागलखानों में बंद करके रखा जाता था और अपमानजनक तरीके से उनका उपचार किया जाता था। इसके अलावा, मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्तियों द्वारा किए जाने वाले व्यवहार के लिए ज़्यादातर लोग उन्हें ही दोषी ठहराया करते थे और उन्हें अपमानित करते थे। वहीं, आज भी, ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि मानसिक रोग का इलाज नहीं हो सकता, लेकिन सच्चाई बहुत अलग है।


दरअसल, ज्यादातर मानसिक रोगों का प्रभावी तरीके से इलाज किया जा सकता है। हालांकि, समस्या यह है कि मानसिक रोग से पीड़ित अनेकों लोग साइकोलॉजिस्ट  या डॉक्टर के पास अपनी समस्या को लेकर नहीं आते। जब आते भी हैं, तो उन्हें जो उपचार मिलता है वह यह जरूरी नहीं की प्रभावी हो, बल्कि नुकसानदेह भी हो सकता है।


गौरतलब है कि शारीरिक समस्याओं के लिए ली जाने वाली दवाओं के भांति ही, मानसिक रोग के लिए ली जाने वाली दवाएं भी केवल तब तक असर करती हैं, जब वे सही मात्रा में सही अवधि के लिए ली जाएं। ऐसे में सही समय पर, सही उपचार कर मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्ति को ठीक किया जा सकता है।

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