सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

AMBULANCE AWARENESS




 [2/11, 12:34] Dr.J.k Pandey: एक आपातकालीन स्थिति को आमतौर पर जीवन अंग या शरीर को खतरा की समस्या के रूप में माना जा सकता है

[2/11, 12:38] Dr.J.k Pandey: ज्यादातर आपात स्थितियों में किसी और को सहायता के लिए लेना चाहिए आपातकालीन सेवा के लिए ही एम्बुलेंस का उपयोग करना चाहिए

[2/11, 12:47] Dr.J.k Pandey: आपातकालीन सेवा के लिए १०८ या  एम्बुलेंस के लिए काल करने के कहा जा सकता है एम्बुलेंस को काल करने का निर्णय समस्या और लक्षणों की गंभीरता पर आधारित होना चाहिए साथ ही साथ सम्भावना है की समस्या बदतर हो सकती है विशेष रूप से समय पर चिकित्सा सहायता तक पहुंचने में देर लग सकती है

[2/11, 12:49] Dr.J.k Pandey: कुछ तकलीफ होती है जिनके लिए हॉस्पिटल में भर्ती होना ही सबसे अच्छा विकल्प होता है जिसमे एम्बुलेंस सेवा का बहुत बड़ा योगदान हो सकता है

[2/11, 13:03] Dr.J.k Pandey: जैसे की : 1.तीव्र सीने का दर्द 2.सांस का फूलना (कमी )ऑक्सीज़न की 3.दिल की धड़कन का तेजी से बढ़ जाना 4.तीव्र रक्तस्त्राव 5.अचानक बेहोशी ,याददास्त कमजोरी 5.हाई ग्रेड फीवर यानि तीव्र ज्वर 6.तीव्र प्रसूति के साथ स्त्री रोग , गर्भपात की स्थिति 7.सड़क यातायात दुर्घटना 8.तीव्र जहर , सांप का काटना 9.हीट स्ट्रोक 10.डायबिटिक केटरोएसिडोसिस 11.गुर्दे ख़राब होना 12.गंभीर संक्रमण 13.तीव्र ह्रदय सम्बन्धी तकलीफ दिल की धड़कन अनियमित होना सीने में असहनीय दर्द

[2/11, 13:06] Dr.J.k Pandey: इन समस्याओं में से कोई भी समस्या हो तो तुरंत एम्बुलेंस सेवा लेना चाहिए तथा हॉस्पिटल में जाकर भर्ती हो जाना चाहिए ..

टिप्पणियाँ

total health ने कहा…
Best and usefull information

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कैनुला क्या है?कैनुला कैसे लगाते हैं ? Cannulation in Hindi

 कैनुला कैसे लगाते हैं ? Cannulation in Hindi कैनुला क्या है? कैनुला एक पतली ट्यूब है, जिसे शरीर में नसों के जरिए इंजेक्ट किया जाता है, ताकि जरूरी तरल पदार्थ को शरीर से निकाला (नमूने के तौर पर) या डाला जा सके। इसे आमतौर पर इंट्रावीनस कैनुला (IV cannula) कहा जाता है। बता दें, इंट्रावीनस थेरेपी देने के लिए सबसे आम तरीका पेरिफेरल वीनस कैनुलेशन (शरीर के परिधीय नसों में कैनुला का उपयोग करना) है। इंट्रावीनस (नसों के अंदर) प्रबंधन का मुख्य लक्ष्य ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना, सुरक्षित और प्रभावी ढंग से उपचार प्रदान करना है। जब किसी मरीज का लंबे समय तक उपचार चलता है, तो ऐसे में इंट्रावीनस थेरेपी की विशेष जरूरत पड़ती है। शोध से पता चला है कि जिन मामलों में इंट्रावीनस कैनुला की जरूरत नहीं होती है, उनमें भी इसका प्रयोग किया जाता है, जबकि कुछ मामलों में इसे टाला जा सकता है। जनरल वार्डों में भर्ती 1,000 रोगियों पर हाल ही में एक शोध किया गया, इस दौरान इन सभी मरीजों के नमूने लिए गए। अध्ययन में पाया गया कि लगभग 33% रोगियों में इंट्रावीनस कैनुला का प्रयोग सामान्य से अधिक समय के लिए किया जा रहा है। ...

आर्टेरियल ब्लड गैस टेस्ट (एबीजी) - Arterial Blood Gas (ABG) in Hindi

 आर्टेरियल ब्लड गैस टेस्ट (एबीजी) - Arterial Blood Gas (ABG) in Hindi आर्टेरियल ब्लड गैस टेस्ट (एबीजी) क्या है? एबीजी टेस्ट धमनियों के रक्त की अम्लता और उनमें मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड व ऑक्सीजन के स्तर का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसकी मदद से यह पता लगाया जाता है, कि फेफड़े कितने अच्छे से ऑक्सीजन को खून में पहुंचा पा रहे हैं और सीओ 2 को बाहर निकाल रहे हैं। फेफड़ों की जांच करके और खून में रक्त के स्तर की जांच करके मेटाबॉलिज्म संबंधी विकारों का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा इन परीक्षणों की मदद से गुर्दे और फेफड़ों के कार्य की जांच की जा सकती है।  आमतौर पर एबीजी टेस्ट निम्न को मापता है: पीएच पार्शियल प्रेशर ऑफ़ ऑक्सीजन (पीएओ2) रक्त में घुला हुआ।  पार्शियल प्रेशर ऑफ़ सीओ2 (पीएसीओ2) रक्त में मौजूद।  ऑक्सीजन कंटेंट (ओ 2 सीटी) या 100 मिलीलीटर रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा। ऑक्सीजन सेचुरेशन (ओ 2 एसएटी) या ऑक्सीजन को ले जाने में प्रयुक्त हीमोग्लोबिन का प्रतिशत। लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद हीमोग्लोबिन रक्त में ऑक्सीजन ले जाता है।  बाईकार्बोनेट: अम्ल-क्षार के मेटाबॉलिक घ...

मोटापे की होम्योपैथिक दवा

 मोटापे की होम्योपैथिक दवा  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने शरीर के ऊतकों में असामान्य रूप से वसा इकट्ठा होने की स्थिति को अधिक वजन और मोटापे के रूप में परिभाषित किया है। यह दोनों ही स्थितियां स्वास्थ्य को खराब कर सकती हैं। इसे बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की मदद से मापा जाता है। बीएमआई शरीर की ऊंचाई और वजन के आधार पर शरीर में अनुमानित फैट होता है। बीएमआई यह निर्धारित करने में मदद करता है कि व्यक्ति का वजन सही है या नहीं। ऐसे लोग जिनका BMI 25 से अधिक या इसके बराबर है, उन्हें अधिक वजन की श्रेणी में गिना जाता है और जिनका BMI 30 या इसके बराबर है वे मोटापे की श्रेणी में आते हैं। अधिक वजन का मुख्य कारण कैलोरी की खपत और इसके उपयोग के बीच असंतुलन है। यदि कोई व्यक्ति अपने शरीर की आवश्यकता से अधिक कैलोरी का सेवन कर रहा है, तो वह धीरे-धीरे मोटापे की चपेट में आ रहा है। अधिक वजन और मोटापे से जूझ रहे लोगों को मस्कुलोस्केलेटल और कुछ कैंसर जैसे एंडोमेट्रियल, स्तन, डिम्बग्रंथि, प्रोस्टेट, लिवर, पित्ताशय की थैली, किडनी और कोलन होने का खतरा अधिक होता है। मस्कुलोस्केलेटल विकार ऐसी स्थितियों क...