सरकारी अस्पताल: 'तारीख पे तारीख' और मुफ्त के कारनामेसरकारी अस्पताल में घुसते ही एक गहरा सत्य समझ आता है - "इलाज तो ऊपर वाला ही करता है, सरकारी अस्पताल तो सिर्फ 'प्रक्रिया' पूरी करता है।"जब आप किसी सरकारी अस्पताल में कदम रखते हैं, तो सबसे पहले आपका स्वागत वहाँ की लंबी लाइनों और टोकन सिस्टम द्वारा होता है। यहाँ मरीज की बीमारी से ज्यादा, उसके धैर्य की परीक्षा ली जाती है। आप सुबह-सुबह लाइन में लगकर पर्ची बनवाते हैं। इस पर्ची का सफर इतना रोमांचक होता है कि इसे पूरा करते-करते आधी बीमारी तो डर से ही गायब हो जाती है।1. कातिलाना पंखे और 'डॉक्टर' की कुर्सीअस्पताल के प्रतीक्षालय (Waiting Area) में लगे पंखे ऐसे घूमते हैं जैसे खुद मरीज हों और उन्हें आराम की सख्त जरूरत हो। जब आप घंटों इंतजार के बाद डॉक्टर के कक्ष में पहुँचते हैं, तो डॉक्टर साहब की टेबल पर रखी फाइलों का पहाड़ आपको जिंदगी के यथार्थ से रूबरू करा देता है। डॉक्टर महोदय बड़ी सहजता से आपको देखते हैं और एक पर्चा थमा देते हैं जिस पर लिखी दवाइयों को पढ़ना किसी डिकोडिंग टास्क से कम नहीं है।2. एक्स-रे और जांच क...
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